पश्चिम बंगाल में 4 दिन में दो दलित मार के टांग दिया गया । कहाँ मर गए दलित के नाम पर भारत बंद करने वाले।


आज वो खा गए जो दलित के नाम पर छाती पिट पिट कर रट थे और बीजेपी को दलित विरोधी कहते थे क्या उनको बीजेपी का दलित दलित नहीं दीखता।  पश्चिम बंगाल  के दलित दलित नहीं है।  ये दोगला पन बताता है जो दलित के नाम पर भारत बंद करने वाले दलित चिंतक दलित के नाम पर बस सियाशत करते है।  पश्चिम बंगाल  में 4 दिन में दो दलित बीजेपी कायर्कर्ता को मार कार टांग दिया जाता है

पश्चिम बंगाल के एक ही जिले में चार दिनों के भीतर दूसरे व्यक्ति की लटकती हुई लाश मिली है. पुरुलिया में इससे पहले जहां 18 साल के दलित त्रिलोचन महतो की पेड़ से लटकती लाश मिली थी, वहीं अब 30 साल के दुलाल कुमार की बॉडी हाई टेंशन तार से लटकती हुई मिली है. बीजेपी ने दावा किया है कि दोनों व्यक्ति पार्टी के कार्यकर्ता थे. बीजेपी ने मौत के लिए ममता बनर्जी की सरकार को जिम्मेदार बताया है.

ममाता बनर्जी के खिलाफ अपनी जबान खोल सके ऐसा कोई दलित हितैषी इस देश में नहीं, इन मामलों पर न कोई कैंडल मार्च ही निकाल रहा है, और हां राहुल गाँधी जो दलितों के मसीहा बने घूमते है, उनके मुख से शब्द नहीं निकल रहे है, चूँकि इन दलितों को ममाता राज में फांसी पर टांग दिया गया है, और ममाता राज के खिलाफ बोलना मना है