Sunday, 23 June 2019

ताज महल या तेजो महालय, जानिए इस रहस्य को


ताज महल के सम्बन्ध में यह आम किवदंत्ती प्रचलित है कि ताजमहल के अन्दर मुमताज की कब्र पर सदैव बूँद बूँद कर पानी टपकता रहता है यदि यह सत्य
है तो पूरे विश्व मे किसी किभी कब्र पर
बूँद बूँद कर पानी नही टपकाया जाता, जबकि प्रत्येक हिंदू शिव मन्दिर में ही शिवलिंग पर बूँद बूँद कर पानी टपकाने
की व्यवस्था की जाती है, फ़िर ताजमहल (मकबरे) में बूँद बूँद कर पानी टपकाने का क्या मतलब….????
प्रो. पी.एन ओक. ने इस पर लम्बे समय तक अनुसंधान किया और 100 से अधिक तथ्यो को लोगो के सामने रखा जिससे यह साबित होता है कि ताजमहल प्रारम्भ से ही बेगम मुमताज का मकबरा न होकर एक हिंदू प्राचीन शिव मन्दिर है जिसे तब तेजो महालय कहा जाता था अपने अनुसंधान के दौरान ओक ने खोजा कि इस शिव मन्दिर को शाहजहाँ ने जयपुर के महाराज जयसिंह से अवैध तरीके से छीन लिया था और इस पर अपना कब्ज़ा कर लिया था
इन तथ्यो को उन्होने अपनी पुस्तक “TAJ MAHAL – THE TRUE STORY” के माध्यम से रखा राजनीतिक भर्त्सना के डर से इंदिरा सरकार ने ओक की सभी पुस्तकें दुकानोँ से वापस ले लीं थीं और इन पुस्तकों के प्रथम संस्करण को छापने वाले संपादकों को भयंकर परिणाम भुगत लेने की धमकियां भी दी गईं थीं।
यमुना नदी के किनारे सफेद पत्थरों से निर्मित अलौकिक सुंदरता की तस्वीर 'ताजमहल' न केवल भारत में, बल्कि पूरे विश्व में अपनी पहचान बना चुका है। ताजमहल को दुनिया के सात आश्चर्यों में शामिल किया गया है। हालांकि इस बात को लेकर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं कि ताजमहल को शाहजहां ने बनवाया है या फिर किसी और ने।

भारतीय इतिहास के पन्नों में यह लिखा है कि ताजमहल को शाहजहां ने मुमताज के लिए बनवाया था। वह मुमताज से प्यार करता था। दुनिया भर में ताजमहल को प्रेम का प्रतीक माना जाता है, लेकिन कुछ इतिहासकार इससे इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका मानना है कि ताजमहल को शाहजहां ने नहीं बनवाया था वह तो पहले से बना हुआ था। उसने इसमें हेर-फेर करके इसे इस्लामिक लुक दिया। दरअसल, इसे शाहजहां और मुमताज का मकबरा माना जाता है। उल्लेखनीय है कि ताजमहल के पूरा होने के तुरंत बाद ही शाहजहां को उसके पुत्र औरंगजेब द्वारा अपदस्थ कर आगरा के किले में कैद कर दिया गया था। शाहजहां की मृत्यु के बाद उसे उसकी पत्नी के बराबर में दफना दिया गया।

दौलत छुपाने की जगह या मुमताज का मकबरा? :
प्रसिद्ध शोधकर्ता और इतिहासकार पुरुषोत्तम नागेश ओक ने अपनी शोधपूर्ण पुस्तक में तथ्‍यों के माध्यम से ताजमहल के रहस्य से पर्दा उठाया है।

इतिहासकार पुरुषोत्तम ओक ने अपनी पुस्तक में लिखा हैं कि शाहजहां ने दरअसल, वहां अपनी लूट की दौलत छुपा रखी थी इसलिए उसे कब्र के रूप में प्रचारित किया गया। यदि शाहजहां चकाचौंध कर देने वाले ताजमहल का वास्तव में निर्माता होता तो इतिहास में ताजमहल में मुमताज को किस दिन बादशाही ठाठ के साथ दफनाया गया, उसका अवश्य उल्लेख होता।

ओक अनुसार जयपुर राजा से हड़प किए हुए पुराने महल में दफनाए जाने के कारण उस दिन का कोई महत्व नहीं? शहंशाह के लिए मुमताज के कोई मायने नहीं थे। क्योंकि जिस जनानखाने में हजारों सुंदर स्त्रियां हों उसमें भला प्रत्येक स्त्री की मृत्यु का हिसाब कैसे रखा जाए। जिस शाहजहां ने जीवित मुमताज के लिए एक भी निवास नहीं बनवाया वह उसके मरने के बाद भव्य महल बनवाएगा?
यहां दफन है मुमताज!

शोधकर्ताओं के अनुसार आगरा से 600 किलोमीटर दूर बुरहानपुर में मुमताज की कब्र है, जो आज भी ज्यों की त्यों है। बाद में उसके नाम से आगरे के ताजमहल में एक और कब्र बनी जो नकली है। बुरहानपुर से मुमताज का शव आगरे लाने का ढोंग क्यों किया गया? माना जाता है कि मुमताज को दफनाने के बहाने शहजहां ने राजा जयसिंह पर दबाव डालकर उनके महल (ताजमहल) पर कब्जा किया और वहां की संपत्ति हड़पकर उनके द्वारा लूटा गया खजाना छुपाकर सबसे नीचले माला पर रखा था जो बहुत काल तक वहीं रखा रहा। वर्तमान में स्थिति क्या है यह कोई नहीं जानता।

मुमताज का इंतकाल 1631 को बुरहानपुर के बुलारा महल में हुआ था। वहीं उन्हें दफना दिया गया था। लेकिन माना जाता है कि उसके 6 महीने बाद राजकुमार शाह शूजा की निगरानी में उनके शरीर को आगरा लाया गया। आगरा के दक्षिण में उन्हें अस्थाई तौर फिर से दफन किया गया और आखिर में उन्हें अपने मुकाम यानी ताजमहल में दफन कर दिया गया।

प्रो. पी. एन. ओक के अनुसंधान
को ग़लत या सिद्ध करने का केवल एक ही रास्ता है कि वर्तमान केन्द्र सरकार बंद कमरों को संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षण में खुलवाए, और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों को छानबीन करने दे ..
1.प्रवेश द्वार पर बने लाल कमल
2.पीछे की खिड़कियाँ और बंद दरवाजे
3.विशेषतः वैदिक शैली मे निर्मित गलियारा
4.मकबरे के पास संगीतालय (एक विरोधाभास)
5.ऊपरी तल पर स्थित एक बंद कमरा
6.निचले तल पर स्थित संगमरमरी कमरों का समूह
7.दीवारों पर बने हुए फूल जिनमे छुपा हुआ है ओम् ( ॐ )
8. निचले तल पर जाने के लिए सीढियां

ताजमहल' वास्तु मुसलमानोंकी नहीं, अपितु वह मूलतः हिंदुओंकी है । वहां इससे पूर्र्व भगवान शिवजीका मंदिर था, यह इतिहास सूर्यप्रकाशके जितना ही स्पष्ट है । मुसलमानोंने इस वास्तुको ताजमहल बनाया । ताजमहल इससे पूर्र्व शिवालय होनेका प्रमाण पुरातत्व विभागके अधिकारी, अन्य पुरातत्वतज्ञ, इतिहासके अभ्यासक तथा देशविदेशके तज्ञ बताते हैं । मुसलमान आक्रमणकारियोंकी दैनिकीमें (डायरी) भी उन्होंने कहा है कि ताजमहल हिंदुओंकी वास्तु है । तब भी मुसलमान इस वास्तुपर अपना अधिकार जताते हैं । शिवालयके विषयमें सरकारके पास सैकडों प्रमाण धूल खाते पडे हैं । सरकार इसपर कुछ नहीं करेगी । इसलिए अब अपनी हथियाई गई वास्तु वापस प्राप्त करने हेतु यथाशक्ति प्रयास करना ही हिंदुओंका धर्मकर्तव्य है । ऐसी वास्तुएं वापस प्राप्त करने हेतु एवं हिंदुओंकी वास्तुओंकी रक्षाके लिए ‘हिंदु राष्ट्र’ अनिवार्य है !
ताज महल या तेजो महालय, जानिए इस रहस्य को Reviewed by desi trend on June 23, 2019 Rating: 5 ताज महल के सम्बन्ध में यह आम किवदंत्ती प्रचलित है कि ताजमहल के अन्दर मुमताज की कब्र पर सदैव बूँद बूँद कर पानी टपकता रहता है यदि यह सत्य ...
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