Monday, 18 November 2019

क्या जेएनयू जैसी संस्थाओं को बंद किया जाना चाहिये..?



"जेएनयु" वैसे कहने को तो शैक्षणिक संस्थान है पर आरोप लगते है कि यहाँ पर पढ़ने वाले छात्र किसी के खास एजेंडे पर काम करते है। अब वह एजेंडा किसी विशेष विचारधारा को पोषित कर उसे राजनीतिक सत्ता तक पहुचाने का हो सकता है। या लाइमलाइट में बने रहने के लिए "पब्लिसिटी स्टंट" का भी हो सकता है। एक बार फिर "जेएनयू" को बदनाम किया जा रहा है। और इस बार एजेंडा पहिले से निर्धारित "फीस बढ़ोत्तरी" के विरोध में है.?
एजेंडा चाहे जो कुछ भी हो पर राजनीतिक सत्ता के लालसा में लार टपका रहे राजनीतिक चिन्टूवो का उद्देश्य हमेशा जेएनयु में हिंसा आगजनी और बदतमीजी को बढ़ावा देना ही रहा है। समझ मे नही आता कि सत्ता के गलियारों में राजीनीतिक तवे पर रोटियां सेंकने वाले लोग जेएनयु में पढ़ रहे "मासूम छात्रों" का ब्रेनवाश कर मोहरा कैसे बना लेते है.? वैसे त्रुटि के लिए माफी चाहती हूँ 40 साल के उम्र में पढ़ने वाला छात्र कभी "मासूम" नही होता.?
पर सवाल सिर्फ इतना भर नही है सवाल ये भी है कि एक तरफ 40 साल के उम्र का वह नौजवान है जो कमाई कर देश मे टैक्स भर कर योगदान दे रहा है। तो वही दूसरी तरफ 40 साल के उम्र का वह नौजवान भी है जो अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर मीडिया के महिला पत्रकार से बदसलूकी भी करता है। और सीनाजोरी भी? ऐसे आपत्तिजनक कार्यो में सिर्फ लड़के ही नही लड़कियां भी संलिप्त है। आंदोलन का मतलब सिर्फ 10 लोगो का जुटजाना या सत्ता पर बैठे लोगों का एक एजेंडे के तहत विरोध करना नही होता। बल्कि उन आदर्श और नैतिक मूल्यों को बनाए रखना भी होता है जो हर बार जेएनयू में अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर तोड़ दिया जाता है। इस बात को जोर देकर मैं इसलिए भी कह रही हूं क्योंकि इस बार वही हुआ जो अक्सर जेएनयू में होता आया है। इस बार भी जेएनयू में प्रदर्शन हुए, इस बार भी जेएनयू में महिला पत्रकारों से बदसलूकी हुई। पर अफसोस कि अपने "हक की लड़ाई" के नाम पर एजेंडे की लड़ाई लड़ रही है महिला आंदोलनकारियो ने ना इसे रोकने के कोशिश की। ना ही अन्य लोगो द्वारा किये जा रहे इस घिनौने कृत्य का विरोध किया। ये सिर्फ पहिला मौका नही है।इसके पहिले भी सैकड़ो मौके आये है जब जेएनयू के छात्रों ने जेएनयू के आदर्शों और मूल्यों का अपमान किया है।
आप विरोध करिये खुलकर करिये पर उस मर्यादा या उन मूल्यों को बचाकर जरूर रखिये जिन्हें सीखने के लिए आपके माता पिता ने आपको जेएनयू में भेजा है। मोहरा तो हर कोई बन जाता हिम्मत हो तो आदर्श बनकर दिखाइए। अपनी नही अपने माँ बाप की सोचिए जिन्होंने आपको पढ़ने के लिए भेजा है।
बाकी "हक की लड़ाई" के नाम पर जिस राजनैतिक एजेंडे के तहत आप काम रहे है। इसे इस देश की जनता भलीभाँति जानती है समझती है, वो हर सवाल का जवाब ढूढ़ लेती है इस सवाल का जवाब भी ढूढ़ ही लेगी कि जेएनयू के नाम पर राजनैतिक एजेंडा चलाने वाले लोग कौन है और क्या जेएनयु जैसी संस्थाओं को बंद कर देना चाहिए..?

This article has been written by Diksha Pandey
क्या जेएनयू जैसी संस्थाओं को बंद किया जाना चाहिये..? Reviewed by desi trend on November 18, 2019 Rating: 5 "जेएनयु" वैसे कहने को तो शैक्षणिक संस्थान है पर आरोप लगते है कि यहाँ पर पढ़ने वाले छात्र किसी के खास एजेंडे पर काम करते है। ...

1 comment:

  1. बिल्कुल सही। मुझे भी अगर देसी. पर तो कैसे पोस्ट करू। सुझाव दे

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